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जीवन में आत्म निर्भर कैसे बने? Aatmnirbher / Self-dependent kaise bane?

  मेरा मानना है की प्रत्येक इंसान (औरत या आदमी) को जिंदगी में आत्मनिर्भर बनना चाहिए. लेकिन ये कोई प्रक्रिया नहीं है जिसे फॉलो करके आप आत्मनिर्भर हो जाओगे. आत्मनिर्भरता एक गुण है एक आदत है, एक कला है, जिंदगी को जीने की, जो की सतत प्रयासों से धीरे धीरे आपमें आती है. आत्मनिर्भर यानि क्या :- आत्मनिर्भर का मतलब है ऐसा काम जिसके लिए आपको किसी पर निर्भर न रहना पड़े. जब आपको यह विश्वास हो जाये की जो कार्य दूसरा व्यक्ति कर सकता है, वही काम आप भी उतनी ही कुशलता के साथ कर सकते हो तो आप ये समझ लीजिये की आप उस कार्य के लिए आत्मनिर्भर हो चुके है .ऐसा ही बाकि सारे कामो के लिए समझ लीजिये . आत्मनिर्भरता में वो सारे काम आते है जिसे आप पसंद करते है जैसे :- खाना बनाना, घर के छोटे मोटे काम, कमाई के साधन और भी बहुत सारे. आत्मनिर्भर कैसे बनते है :- कुछ भी होने या बनने के लिए क्या जरुरी है, एक लक्ष्य और मेहनत. ठीक इसी तरह आत्मनिर्भर होने के लिए के लिए भी यही गुण आवश्यक है . सबसे पहले तो आपको ये तय करना है की आपको किस कार्य में आत्मनिर्भर बनना है , उसके बाद उस कार्य को खुद से करने की जरुरत है. जरुरत है उस क...
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जीवन में आगे बढ़ने के लिए, ये आदते छोडें | Jivan me aage badhne ke liye chore..webseries and gaming ki aadte.

                                                     आप अपना कीमती समय बर्बाद कर रहे है                                      दोस्तो, आज के जमाने में स्मार्टफोन का इस्तेमाल, वेबसीरीज कंटेंट (Webseries) देखना आम बात हो गई है जो कि आपको भरपूर मजा देती है लेकिन क्या आपको ये पता है कि आपका ये मजा ही आपको जिंदगी में आगे बढने से रोक रहा है। कैसे? आइये जानते है। हर इंसान दिन में कम से कम 1 घंटे फोन का इस्तेमाल तो करता ही है। कुछ लोग तो 2-2 घटें तक मोबाईल पर गेम खेलते है और कुछ तो सारा दिन फोन से चिपके रहते है लेकिन आपको मिलता क्या है, कुछ नही। पर क्या आपको पता है कि जिन्होंने इन सब हथियारों को जन्म दिया है वो लोग इससे कितना पैसा कमाते है। एक बार इंटरनेट पर जरूर देखियेगा। एक तरफ वो लोग है जो बिजनैस के बारे में सोच रहे है पैसा कमाने के...

सकारात्मक सोच कैसे बनाये रख सकते हैं? How to develop positive thinking

नमस्ते सभी मित्रो को, सकारात्मक विचार/Positive thoughts यह प्रश्न पूछना बहुत मायने रखता है सम्पूर्ण मानव जाती के लिए। सकारात्मक सोच की बाते करना बड़ा आसान है, और जब सब कुछ अच्छा चल रहा हो तो हर कोई व्यक्ति सकारात्मक सोच का भाषण देता है। लेकिन जैसे ही थोड़ा कुछ बुरा होता है या कोई परेशानी आती है, तो सारी ज्ञान की बाते धरी की धरी रह जाती है। ऐसे में बहुत मुश्किल हो जाता है की सकारात्मक सोच कैसे बनायीं जाये, चाहे परिस्तिथि कैसी भी क्यों न हो। सकारात्मक सोच है क्या ? सकारात्मक सोच का अर्थ ? सकारात्मक सोच जीवन के विभिन्न पहलुओं को अलग ढंग से देखने की दृष्टि है। विभिन्न परिस्तिथियों में लोग जहा अटक जाते है या अच्छे पहलु या अवसरों को नहीं देख पाते , ऐसी दशा में अलग नजरिये से कुछ अच्छा देखने की कला है, सकारात्मक सोच। ये कहानी देखिये - एक गांव में दो साधु अपने झोपड़े में रहते थे. एक दिन आंधी आयी और आधा झोपड़ा टूट गया. पहला साधु तो गुस्सा होने लगा, ईश्वर से शिकायत करने लगा की हम गरीब का झोपड़ा ही क्यों तोडा. तभी वह दूसरा साधु भी आया और उसने उससे कहा की देखा हमारी सारी प्रार्थना बेकार गयी हमारा झो...

ध्यान करने के बाद हमें और ज्यादा विचार क्यों आते हैं? | Dhyan karne ke baad aur jyada vichar kyu aate hai?

नमस्ते   सभी मित्रो को ,  बहुत जयादा  विचार  आते  हैं, क्यों ? दरअसल होता ये है की जब हम किसी कार्य में व्यस्त होते है तब भी हमारे दिमाग में विचार चल रहे होते है, लेकिन व्यस्तता के कारण हमारा ध्यान नहीं जाता और हमें लगता है की विचार नहीं आते , लेकिन  अगर आपने कभी बहुत गहरे तल पर ख्याल किया हो तो आपको पता चलेगा की विचार कार्य के दौरान भी होते है और कई बार हमें इसका पता भी चलता है।  कई बार लोग काम करते करते गाना गाने लगते है, बाते करने लगते है , प्यार ,दोस्ती, दुश्मनी आदि के बारे में भी विचार आते है, और सोचते हुए काम करते है।  हमारी जाने अनजाने में एक बहुत गहरी और पुरानी आदत है बात करने की । हम बहुत उतावले है किसी से बाते करने के लिए, जब कोई नहीं मिलता तो खुद से बाते शुरू हो जाती है। अब जब आप फ्री होते हो तो सारे विचार एक साथ आप पर हावी हो जाते है और चूँकि कोई काम नहीं है तो विचार ज्यादा साफ़ दिखाई देने लगते है।  सबसे बड़ी समस्या ही यही है की आप ध्यान करते ही इसीलिए हो ताकि विचार शांत हो जाये।  ये बिलकुल ऐसा है जैसे रोते हुए बच्चे को आप लॉली...

सफलता प्राप्ति के लिए अंतिम साँस तक प्रयास करे | safalta ke liye kya kare ?

नमस्ते दोस्तों, दोस्तों दुनिया में हर इंसान की इच्छा होती है कि वह बहुत सफल बने। लेकिन सफल होने के लिए हमें लक्ष्य भी निर्धारित करने होते हैं बिना लक्ष्य के इंसान दिशाहीन हो जाता है जैसे सबवे सर्फर(subway surfer) गेम में भागता हुआ इंसान।लक्ष्य निर्धारित करने के बाद लक्ष्य को पूरा करने के लिए आवश्यक है, धैर्य और साहस। लेकिन आपने कभी ध्यान दिया हो तो आपको पता चलेगा कि जब हम अपने लक्ष्य के करीब होते हैं तभी हमारा धैर्य और साहस खोने लगता है।दिमाग अपनी चाल चलता है और हम अपना होश खो बैठते हैं। बहुत कम लोग ऐसे होंगे जो सफलता मिलने तक अपने धैर्य को बनाए रखने में कामयाब हो पाते हैं।इस विषय पर अपने विचार रखते हुए मैं आपको एक कहानी बताना चाहूंगा:- कहानी :-   एक व्यक्ति था जो मध्यम वर्ग से था और अमीर बनने के लिए आसान तरीकों की खोज में रहता था। वह रोज भगवान से एक ही बात करता था कि हे प्रभु मुझे आप सोने से भरा बैग दे दो बस।1 दिन भगवान ने सोचा इस को एक मौका देते हैं। एक दिन भगवान ने उसको कहा कि मैं तुझे सोने से भरा बैग दूंगा लेकिन तुझे 24 घंटे तक आंखें बंद कर कर यह मंत्र पढ़ना होगा  "मुझ...

UDAS MAN KO KAISE KUSH KARE | उदास मन को कैसे खुश करे।

नमस्ते दोस्तों,  दोस्तों कई बार हमारे साथ ऐसा होता है की हमारा मन अचानक से दुखी और उदास सा होने लगता है। हम परेशान और बैचैन होने लगते है। सब कुछ सही चल रहा होता है लेकिन हमारा मन उदास होने लगता है। इसके कई कारण हो सकते है लेकिन फ़िलहाल हम कारण पर बात नहीं करेंगे, हम बात करेंगे समाधान की।   दोस्तों जब भी मन उदास या दुखी होने लगता है तो फिर कुछ भी अच्छा नहीं लगता है। मन अकेले रहने को करता है और परेशानी बढ़ने लगती है, सब कुछ बेकार लगने लगता है।  हमारे दिमाग पर नकारात्मक विचार ज्यादा हावी होने लगते है। ऐसे में क्या करे कुछ समझ नहीं आता।  लेकिन मै आज आपके लिए एक उपाय लेके आया हु, जिससे आपको इस उदासी से बाहर निकलने में मदद मिले।   अब करना क्या है ? दोस्तों मेरा विश्वास है की अगर आप ये उपाय इस्तेमाल करेंगे तो अवश्य ही , कुछ मिनटों में ही आपकी सारी उदासी , परेशानी , चिंता, अकेलापन सब ख़त्म हो जायेगा। चंद पलो में आपका मन खुश हो जाएगा, और आप एक नयी ऊर्जा अनुभव करने लगेंगे। लेकिन दोस्तों इस उपाय के लिए तयारी आपको अभी से करनी पड़ेगी।  तो चलिए दे...

अच्छी और बुरी संगत का असर

बुरी संगत का असर   दोस्तों आज मैं बात करने वाला हूं उस विषय पर जिसके बारे में बहुतायत देखने और सुनने को मिलता है दोस्तों आपने सुना होगा लोगों को यह कहते हुए की यह गलत संगत में पड़ गया है या फिर गलत स्थान पर  बैठ गया है या उसकी  संगत  बहुत अच्छी है आदि . अच्छी और बुरी संगत का असर तो दोस्तों अब सवाल यह है कि क्या  बुरी संगत  किसी इंसान को बिगाड़ सकती हैं या फिर क्या अच्छी संगत  किसी इंसान को अच्छा बना सकती है आइए जानने की कोशिश करते हैं यदि आम  लोगों की राय ले तो ज्यादातर लोग इस कथन से सहमत होंगे। एक  दोहा  भी मिलता है " कदली सीप भुजंग मुख, स्वाति एक गुण तीन    जैसी संगति बैठिए , तैसोई फल दिन।  " इसका अर्थ है कि एक पानी की बूंद अगर तीन अलग-अलग स्थानों पर गिरे तो अलग-अलग प्रकार के  असर दिखाती है अतः यह कहा जा सकता है कि  संगति अपना असर दिखाती  है। विपक्ष में तर्क :- यदि मैं इसके विपक्ष में तर्क दूं और अगर बहुत से अन्य व्यक्तियों से इसके बारे में राय ली जाए तो  वह भी इस कथन पर सहमत हो सकते है...