सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

अच्छी और बुरी संगत का असर

बुरी संगत का असर 

दोस्तों आज मैं बात करने वाला हूं उस विषय पर जिसके बारे में बहुतायत देखने और सुनने को मिलता है
दोस्तों आपने सुना होगा लोगों को यह कहते हुए की यह गलत संगत में पड़ गया है या फिर गलत स्थान पर 
बैठ गया है या उसकी संगत बहुत अच्छी है आदि .

अच्छी और बुरी संगत का असर

तो दोस्तों अब सवाल यह है कि क्या बुरी संगत किसी इंसान को बिगाड़ सकती हैं या फिर क्या
अच्छी संगत किसी इंसान को अच्छा बना सकती है आइए जानने की कोशिश करते हैं यदि आम 
लोगों की राय ले तो ज्यादातर लोग इस कथन से सहमत होंगे। एक दोहा भी मिलता है

"कदली सीप भुजंग मुख, स्वाति एक गुण तीन
   जैसी संगति बैठिए , तैसोई फल दिन। "

इसका अर्थ है कि एक पानी की बूंद अगर तीन अलग-अलग स्थानों पर गिरे तो अलग-अलग प्रकार के 
असर दिखाती है अतः यह कहा जा सकता है कि संगति अपना असर दिखाती है।

विपक्ष में तर्क :-
यदि मैं इसके विपक्ष में तर्क दूं और अगर बहुत से अन्य व्यक्तियों से इसके बारे में राय ली जाए तो 
वह भी इस कथन पर सहमत हो सकते हैं या संगति अपना असर पूर्ण रूप से नहीं दिखाती है . 
एक दोहा फिर से देखिए जो रहीम जी का है

"जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग 
चंदन विष व्यापै नहीं, लिपटे रहत भुजंग ."

इसका अर्थ है कि सांप चंदन के पेड़ से हमेशा लिपटा रहता है लेकिन चंदन अपना गुण कभी नहीं होता है 
होता है वह अपनी खुशबू निरंतर फैलाता रहता है । चन्दन पर साप को कोई असर नहीं होता। इस आधार 
पर हम ये कह सकते है की बुरी संगत का असर पूर्णतः नहीं पड़ता है।

आपके लिए सार :-

अगर आप मेरा व्यक्तिगत विचार बताने के लिए बताने के लिए मुझसे करेंगे तो मैं यह कहूंगा 
कि यह पंक्ति एक विचार से सत्य हो सकती है लेकिन पूर्ण रूप से सत्य नहीं हो सकती है 
मेरा व्यक्तिगत रूप से यह मानना है कि इंसान का बिगड़ना और सुधारना उसकी अपने हाथों में है 
यह स्वयं व्यक्ति पर निर्भर करता है कि उसे अपने जीवन को किस दिशा में ले जाना है हालांकि 
संगत भी अपना महत्वपूर्ण असर दिखाती है ।लेकिन इतनी भी सक्षम नहीं कि व्यक्ति की जीवन 
को पूरी तरह प्रभावित कर सके ।

दोस्तों यह मेरे अपने व्यक्तिगत विचार हैं आप इस बात से सहमत अथवा असहमत हो सकते हैं 
यदि किसी प्रकार से आप इस लेख से और सहमत हूं तो मुझे कमेंट करके जरूर बताएं आपका 
कीमती समय देने के लिए धन्यवाद ।

जय हिन्द 
जय भारत

 


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

हमेशा बेहतर सोचे लेकिन बुरे के लिए तैयार रहे |(Always look for best but prepare for worst)|

नमस्कार दोस्तो  दोस्तो दुनिया का हर इंसान जीवन मे सफल होने और कुछ अलग करने की सोचता है। इनमे से कुछ लोग तो  सिर्फ सोचते होंगे और कुछ लोग लक्ष्य निर्धारित करके योजना भी बनाते होंगे लेकिन अमल नहीं करते होंगे  और कुछ लोग कदम उठाते होंगे लेकिन सफल नहीं हो पाते होंगे। लेकिन ऐसा क्यू होता होगा??? चलिये कोशिश करते है समझने की ।                              अच्छी सोच, और बुरे के लिए तैयार - क्यों ??                                                                                      दोस्तो एक बात आप हमेशा याद रखिएगा की वक्त अच्छा हो या बुरा हो कभी भी  ठहरता नहीं है। समय को बदलने मे देर नहीं लगती। हो सकता है आज अनुकूल परिस्थितियां हो और आने  वाले पल मे प...

Jivan samjhane wale dohe | जीवन समझाने वाले दोहे |

कुछ दोहे जो आपके जीवन को समझने में काम आएंगे। दोस्तों आपने बहुत से दोहे पढ़े होंगे, सुने होंगे, लेकिन उसका वास्तविक अर्थ शायद ही किसी ने सीखा होगा। आज बात करते है, उनके वास्तविक अर्थ की। दोस्तों कबीरदास जी, रहीम जी और तुलसीदास जी तथा और भी बहुत से लोगो ने जिंदगी की हकीकत को देखकर,  उन्हें दोहो में पिरोया था। ऐसे कुछ दोहे है :- 1.) जैसे तिल में तेल है, ज्यों चकमक में आग,      तेरा साई तुझमे है, तू जाग सके तो जाग। दोस्तों यह दोहा कबीरदास जी का है। मतलब है, असली मूल तत्व अंदर ही होता है। उसी तरह भगवन भी हमारे अंदर ही है। हमें पहचानने की जरुरत है।  2.) एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय। ‘रहिमन’ मूलहि सींचिबो, फूलहि फलहि अघाय॥                                             दोस्तों यह दोहा रहीम जी द्वारा रचित है।  इसका सीधा सा अर्थ ये है की अगर हम किसी एक काम को पूरी लगन और मेहनत से करे तो हमें उस काम में महारत हासिल हो सकती है, और...

जीवन में आत्म निर्भर कैसे बने? Aatmnirbher / Self-dependent kaise bane?

  मेरा मानना है की प्रत्येक इंसान (औरत या आदमी) को जिंदगी में आत्मनिर्भर बनना चाहिए. लेकिन ये कोई प्रक्रिया नहीं है जिसे फॉलो करके आप आत्मनिर्भर हो जाओगे. आत्मनिर्भरता एक गुण है एक आदत है, एक कला है, जिंदगी को जीने की, जो की सतत प्रयासों से धीरे धीरे आपमें आती है. आत्मनिर्भर यानि क्या :- आत्मनिर्भर का मतलब है ऐसा काम जिसके लिए आपको किसी पर निर्भर न रहना पड़े. जब आपको यह विश्वास हो जाये की जो कार्य दूसरा व्यक्ति कर सकता है, वही काम आप भी उतनी ही कुशलता के साथ कर सकते हो तो आप ये समझ लीजिये की आप उस कार्य के लिए आत्मनिर्भर हो चुके है .ऐसा ही बाकि सारे कामो के लिए समझ लीजिये . आत्मनिर्भरता में वो सारे काम आते है जिसे आप पसंद करते है जैसे :- खाना बनाना, घर के छोटे मोटे काम, कमाई के साधन और भी बहुत सारे. आत्मनिर्भर कैसे बनते है :- कुछ भी होने या बनने के लिए क्या जरुरी है, एक लक्ष्य और मेहनत. ठीक इसी तरह आत्मनिर्भर होने के लिए के लिए भी यही गुण आवश्यक है . सबसे पहले तो आपको ये तय करना है की आपको किस कार्य में आत्मनिर्भर बनना है , उसके बाद उस कार्य को खुद से करने की जरुरत है. जरुरत है उस क...