नमस्ते सभी मित्रो को,
सकारात्मक विचार/Positive thoughts
यह प्रश्न पूछना बहुत मायने रखता है सम्पूर्ण मानव जाती के लिए। सकारात्मक सोच की बाते करना बड़ा आसान है, और जब सब कुछ अच्छा चल रहा हो तो हर कोई व्यक्ति सकारात्मक सोच का भाषण देता है। लेकिन जैसे ही थोड़ा कुछ बुरा होता है या कोई परेशानी आती है, तो सारी ज्ञान की बाते धरी की धरी रह जाती है। ऐसे में बहुत मुश्किल हो जाता है की सकारात्मक सोच कैसे बनायीं जाये, चाहे परिस्तिथि कैसी भी क्यों न हो।
सकारात्मक सोच है क्या ? सकारात्मक सोच का अर्थ ?
सकारात्मक सोच जीवन के विभिन्न पहलुओं को अलग ढंग से देखने की दृष्टि है। विभिन्न परिस्तिथियों में लोग जहा अटक जाते है या अच्छे पहलु या अवसरों को नहीं देख पाते , ऐसी दशा में अलग नजरिये से कुछ अच्छा देखने की कला है, सकारात्मक सोच।ये कहानी देखिये - एक गांव में दो साधु अपने झोपड़े में रहते थे. एक दिन आंधी आयी और आधा झोपड़ा टूट गया. पहला साधु तो गुस्सा होने लगा, ईश्वर से शिकायत करने लगा की हम गरीब का झोपड़ा ही क्यों तोडा. तभी वह दूसरा साधु भी आया और उसने उससे कहा की देखा हमारी सारी प्रार्थना बेकार गयी हमारा झोपड़ा टूट गया लेकिन दूसरे साधु ने कहा की प्रभु तेरा धन्यवाद है. तो पहले साधु ने पूछा की ऐसा क्यों कह रहे है. तब दूसरे साधु ने कहा की देखा हमारी प्रार्थना का फल आंधी पूरा झोपड़ा ले जा सकती थी लेकिन सिर्फ आधा झोपड़ा तोडा. फिर उस साधु ने उस रत झोपड़े में मस्ती से गीत गए और रात को बारिश भी हुई तो उसके मजे लिए वही दूसरा साधु चिंता में रहा. इसे कहते है सकारात्मक सोचना.
सकारात्मक सोच कैसे आती है ?
सकारात्मक सोच कोई एक दिन में नहीं बनती है, और न ही इसके लिए कोई कोर्स किया जाता है या सिखने से बनती है। यह तो आपके विभिन्न परिस्तिथियों को ध्यान से देखने और समझने पर निर्भर करता है। यदि बचपन से आपके विचार सकारात्मक रहे हो तो धीरे धीरे सतत अभ्यास से और बार बार प्रयास से आपके भीतर सकारात्मकता का जन्म होता है और आपकी सोच सकारात्मकता का रूप ले लेती है।सकारात्मक सोच के लाभ.
"नजर बदलो, नज़ारे बदल जायेंगे
सोच बदलो, सितारे बदल जायेंगे"
जैसे जैसे आपमें देखने का नजरिया बदलेगा और आपमें सकारात्मक विचारो का जन्म होगा, वैसे वैसे आप में एक अलग और नयी ऊर्जा का जन्म होगा और आप पहले जैसे नहीं रह जायेंगे. आपकी नकारात्मकता दूर होने लगेगी,
आपकी चिंताए, परेशानियां, दुःख-दर्द कम होने लगेंगे और और बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान आसानी से निकाल पाओगे. धीरे धीरे स्ट्रेस, डिप्रेशन, तनाव आपकी जिंदगी से विदा होंगे और आपकी जिंदगी खुशी, मौज-मस्ती से भर जाएगी.
हर जगह सकारात्मकता काम नहीं आती।
अगर आप ये सोचते है की जिंदगी में सकारात्मक सोच होने से सब कुछ हो जाता है यार सब जिंदगी में सकारात्मक होने से जिंदगी में समस्याए नहीं आती या जल्दी से ख़त्म हो जाती है, तो महाशय ऐसा भी कुछ नहीं है। अगर आपको रोज कोई इंसान गाली दे या आपके साथ दुर्व्यवहार करे तो आप क्या सकारात्मक सोच रखकर आगे बढ़ोगे। कोई आपका बड़ा नुकसान कर देता है तो क्या आप सकारात्मक सोच पाएंगे? अगर कोई आपको नुकसान पहुंचता है या पहुंचने वाला है तो वहां हमें तुरंत कुछ करना है जो हम कर सकते है।आपको क्या करना चाहिए ? मन के हारे हार है, मन के जीते जीत
जब भी बुरा वक़्त आये या फिर आपको लगे की आप मुश्किलों से घिरे हुए है तो सबसे पहले तो आपको ये देखना है की इस समय मेरे साथ क्या क्या हो रहा है और इसका असली कारण क्या है। क्या मै कुछ उपाय कर सकता हु जिससे सब सही हो जाये, या कुछ ऐसी स्तिथिया हो गयी है जिसमे आपको लगता हो की आप कुछ नहीं कर सकते। यदि आपके कुछ करने से या थोड़े से प्रयास से सही हो सकता है तो फिर चिंता की बात क्या है। बस आप अच्छे से अपना काम कीजिये।यदि फिर भी आपके प्रयास आपका साथ नहीं दे पा रहे हो तो निराश नहीं होना है, आपको जरुरत है अच्छे सलाहकार की, मोटिवेशनल स्टोरीज पढ़ने और सुनने की। अगर इसके बाद भी कुछ सही नहीं हो रहा है तो आप यही समझ लो की इस समय आपका बुरा वक़्त चल रहा है, आपको कम से कम बोलना है, अच्छे काम करते रहना है.जैसे ही वक़्त बदलेगा सब सही हो जाएगा।
सार :-
बस एक बात याद रखनी है की हमें कोशिश यही करनी है की हम अच्छा देखे, अच्छे से सुने और अपने कर्म करे और जीवन की स्तिथियो को हर तरीके से देखने की कोशिश करे। यदि हमें ऐसा लगे की कही हमारी गलती की वजह से कुछ हुआ हो तो बिना संकोच के माफ़ी मांग लेनी है , और यदि किसी और ने कुछ किया है और वो आपसे माफ़ी मांगता है तो आपको बड़ा दिल करे उसे माफ़ कर देना है, ये सोचके की रात गयी बात गयी।
उम्मीद है मेरी बाते आपको कुछ सहायता दे सके। ये सब मेरे व्यक्तिगत विचार है आप इससे सहमत या असहमत हो सकते है।
जय हिन्द
जय भारत

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें