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सफलता प्राप्ति के लिए अंतिम साँस तक प्रयास करे | safalta ke liye kya kare ?

नमस्ते दोस्तों,

दोस्तों दुनिया में हर इंसान की इच्छा होती है कि वह बहुत सफल बने। लेकिन सफल होने के लिए हमें लक्ष्य भी निर्धारित करने होते हैं बिना लक्ष्य के इंसान दिशाहीन हो जाता है जैसे सबवे सर्फर(subway surfer) गेम में भागता हुआ इंसान।लक्ष्य निर्धारित करने के बाद लक्ष्य को पूरा करने के लिए आवश्यक है, धैर्य और साहस।

लेकिन आपने कभी ध्यान दिया हो तो आपको पता चलेगा कि जब हम अपने लक्ष्य के करीब होते हैं तभी हमारा धैर्य और साहस खोने लगता है।दिमाग अपनी चाल चलता है और हम अपना होश खो बैठते हैं। बहुत कम लोग ऐसे होंगे जो सफलता मिलने तक अपने धैर्य को बनाए रखने में कामयाब हो पाते हैं।इस विषय पर अपने विचार रखते हुए मैं आपको एक कहानी बताना चाहूंगा:-

कहानी :- 

एक व्यक्ति था जो मध्यम वर्ग से था और अमीर बनने के लिए आसान तरीकों की खोज में रहता था। वह रोज भगवान से एक ही बात करता था कि हे प्रभु मुझे आप सोने से भरा बैग दे दो बस।1 दिन भगवान ने सोचा इस को एक मौका देते हैं। एक दिन भगवान ने उसको कहा कि मैं तुझे सोने से भरा बैग दूंगा लेकिन तुझे 24 घंटे तक आंखें बंद कर कर यह मंत्र पढ़ना होगा  "मुझे सोने का बैग मिलेगा"। उसने कहा प्रभु यह तो बड़ा आसान है और मैं कल सुबह ही मंत्र जाप के लिए बैठूंगा।
अगले दिन सुबह सूर्योदय से पहले नहा धोकर,भगवान को याद कर के वह मंत्र जप करने लगा। कुछ घंटों तक तो वह बड़ी आसानी से जाप करता रहा लेकिन धीरे-धीरे उसका आनंद और उसका उत्साह कम होने लगा। दोपहर तक तो थोड़ी सी थकान भी लगने लगी और शाम तक उस पर निराशा हावी होने लगी। रात होते होते तो उसके मन में नकारात्मक विचार धीरे धीरे हावी होने लग गए। आधी रात तक तो उसको लगने लगा की मै सुबह से बैठा हु, लेकिन अभी तक कुछ नजर नहीं आ रहा है, लगता है भगवान ने उसके साथ छल किया है।
और सुबह समय समाप्त होने से कुछ देर पहले उसके दिमाग पर बुरे विचार हावी होने लगे और उसे लगा की उसे कुछ नहीं मिलने वाला है, इसलिए वो मंत्र जाप से उठ गया। वो भगवान को याद करके , भगवान को कहने लगा, हे प्रभु! आपने मुझसे झूठ कहा।
 तब भगवान मुस्कुरा कर बोले - कि तुम अगर कुछ समय और बैठ जाते तो तुम्हें सोने का बैग जरूर मिल जाता, लेकिन तुमने २४ घंटे पुरे नहीं किये। तुमने अंतिम समय पर उठ कर अपना परिणाम खो दिया तुम्हें अपनी मेहनत और लगन पर विश्वास नहीं था इसलिए तुम्हें मंजिल नहीं मिली। यह सुनकर उसे अपने आप पे बहुत गुस्सा आया और बहुत पछतावा हुआ। 

तो दोस्तों इस कहानी से हमें क्या सीखने को मिलता है,यही कि जब तक सफलता प्राप्त नहीं हो जाती हमें अपने प्रयासों को बनाए रखना चाहिए। कभी भी अपने विचारों को अपने आप पर हावी ना होने दें और अपने धैर्य और साहस को ना खोये ना।

दोस्तों यह कहानी मेरी लिखी नहीं है, लेकिन कहानी के अलावा बाकी के विचार मेरे है।  मैंने समझाने के लिए इस कहानी का प्रयोग किया है। अगर किसी को कोई शिकायत हो या कोई समस्या हो तो पहले मुझे जरूर बताये।

जय हिन्द 
जय भारत

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