सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

ध्यान करने के बाद हमें और ज्यादा विचार क्यों आते हैं? | Dhyan karne ke baad aur jyada vichar kyu aate hai?

नमस्ते सभी मित्रो को

बहुत जयादा विचार आते हैं,क्यों ?

दरअसल होता ये है की जब हम किसी कार्य में व्यस्त होते है तब भी हमारे दिमाग में विचार चल रहे होते है, लेकिन व्यस्तता के कारण हमारा ध्यान नहीं जाता और हमें लगता है की विचार नहीं आते , लेकिन अगर आपने कभी बहुत गहरे तल पर ख्याल किया हो तो आपको पता चलेगा की विचार कार्य के दौरान भी होते है और कई बार हमें इसका पता भी चलता है। कई बार लोग काम करते करते गाना गाने लगते है, बाते करने लगते है , प्यार ,दोस्ती, दुश्मनी आदि के बारे में भी विचार आते है, और सोचते हुए काम करते है। 
हमारी जाने अनजाने में एक बहुत गहरी और पुरानी आदत है बात करने की। हम बहुत उतावले है किसी से बाते करने के लिए, जब कोई नहीं मिलता तो खुद से बाते शुरू हो जाती है। अब जब आप फ्री होते हो तो सारे विचार एक साथ आप पर हावी हो जाते है और चूँकि कोई काम नहीं है तो विचार ज्यादा साफ़ दिखाई देने लगते है। सबसे बड़ी समस्या ही यही है की आप ध्यान करते ही इसीलिए हो ताकि विचार शांत हो जाये। ये बिलकुल ऐसा है जैसे रोते हुए बच्चे को आप लॉलीपॉप देकर शांत करना चाहते हो। दरअसल ध्यान करने के बाद ज्यादा विचार नहीं आते है , विचार तो पहले ही ज्यादा थे लेकिन आप शांत होकर बैठ गए हो इसलिए नजर आ रहे है। 

विचार ज्यादा आते है, विचरो को कैसे कम करे ? मन को शांत कैसे करे ?

समस्या ये नहीं है की विचार ज्यादा आते है ध्यान करने के बाद भी, समस्या ये है की आप वर्षो पुरानी आदत को एकदम से बदलना चाहते है। जो की संभव नहीं है। आपने दो चार पत्थर रख दिए और सोच रहे हो की मकान क्यों नहीं बना। अरे समय लगता है। कोई इंसान इतने सालो से किसी चीज का शौक़ीन है और आप कहो की कल से बंद तो वो क्या करेगा। झूटमूठ का नाटक करेगा और यहाँ दोहरा व्यक्तित्व जन्म लेगा। वो होगा कुछ और दिखायेगा कुछ।

अगर आपको ध्यान करना है तो मै एक तरीका बताता हु। आप अपने घर के आस पास किसी पार्क में चले जाये या पार्क नहीं हो तो घर की छत पर चले जाये। अब चुपचाप आपको सिर्फ और सिर्फ लोगो को देखना है बिना विचार करे।अगर आप घर की छत पर हो तो उड़ते हुए पक्षियों को देखे। विचार आते है तो कोई चिंता की बात नहीं है,आने दे लेकिन आप सिर्फ देखने में लगे रहे और कोशिश करे की ज्यादा विचारो में न उलझे। ये आप कुछ दिनों तक रोज करे। एकदम तो नहीं लेकिन कुछ दिनों के प्रयास से आपको नतीजे अवश्य प्राप्त होंगे। 

ध्यान मुद्रा/ Dhyan Mudra 

Image credit :- Fizkes/Dreamstime.com

ध्यान साधना / मौन साधना / मैडिटेशन/ Meditation.

सर्वप्रथम आप किसी शांत जगह पर आसान बिछाकर बैठ जाये. आसान न भी तो भी चलेगा. शरीर को सीधा रखे और ध्यान रहे की आपको बैठने में किसी प्रकार की कोई तकलीफ न हो. फिर गहरी साँस भरे और फिर छोड़े और ऐसा करीब 10-15 बार करे. अब आप अपने हाथो को ऊपर दिए हुए चित्र के अनुसार रखे. अब अपनी आँखे बंद करे और अपने भीतर देखते रहे. इस दौरान आपके मन में बहुत से विचार उठेंगे, उन्हें उठने दे आप उन्हें सिर्फ देखे ..कुछ ही देर में विचार धीरे धीरे कम होने लगेंगे. और आपको शांति का अनुभव होने लगेगा . एक बात मै आपको बता दू की मौन से मन में उठने वाले विचार कट जाते है, इसलिए मौन को बहुत अधिक महत्व दिया गया है. आप जितनी ज्यादा मौन साधना करेंगे उतने ही आप शांत होने लगेंगे.

जब आप रात को सोने के लिए जाये तो उससे पहले शांत हो कर कुछ देर के लिए फिर से इसी प्रक्रिया को दोहराइये. कोशिश कीजिये कुछ सब बातो को भूलने की और शांत रहने की. और इसे नियमित रूप से अभ्यास में लाने का प्रयास कीजिये और समयावधि भी बढ़ाते रहे. धीरे धीरे आपके विचार शांत होंगे और आपको मानसिक शांति का अनुभव भी होगा .

उम्मीद है की आपको कुछ सहायता प्राप्त हुई होगी। कोई प्रॉब्लम है तो कमेंट कर सकते है

जय हिन्द 
जय भारत 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

हमेशा बेहतर सोचे लेकिन बुरे के लिए तैयार रहे |(Always look for best but prepare for worst)|

नमस्कार दोस्तो  दोस्तो दुनिया का हर इंसान जीवन मे सफल होने और कुछ अलग करने की सोचता है। इनमे से कुछ लोग तो  सिर्फ सोचते होंगे और कुछ लोग लक्ष्य निर्धारित करके योजना भी बनाते होंगे लेकिन अमल नहीं करते होंगे  और कुछ लोग कदम उठाते होंगे लेकिन सफल नहीं हो पाते होंगे। लेकिन ऐसा क्यू होता होगा??? चलिये कोशिश करते है समझने की ।                              अच्छी सोच, और बुरे के लिए तैयार - क्यों ??                                                                                      दोस्तो एक बात आप हमेशा याद रखिएगा की वक्त अच्छा हो या बुरा हो कभी भी  ठहरता नहीं है। समय को बदलने मे देर नहीं लगती। हो सकता है आज अनुकूल परिस्थितियां हो और आने  वाले पल मे प...

Jivan samjhane wale dohe | जीवन समझाने वाले दोहे |

कुछ दोहे जो आपके जीवन को समझने में काम आएंगे। दोस्तों आपने बहुत से दोहे पढ़े होंगे, सुने होंगे, लेकिन उसका वास्तविक अर्थ शायद ही किसी ने सीखा होगा। आज बात करते है, उनके वास्तविक अर्थ की। दोस्तों कबीरदास जी, रहीम जी और तुलसीदास जी तथा और भी बहुत से लोगो ने जिंदगी की हकीकत को देखकर,  उन्हें दोहो में पिरोया था। ऐसे कुछ दोहे है :- 1.) जैसे तिल में तेल है, ज्यों चकमक में आग,      तेरा साई तुझमे है, तू जाग सके तो जाग। दोस्तों यह दोहा कबीरदास जी का है। मतलब है, असली मूल तत्व अंदर ही होता है। उसी तरह भगवन भी हमारे अंदर ही है। हमें पहचानने की जरुरत है।  2.) एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय। ‘रहिमन’ मूलहि सींचिबो, फूलहि फलहि अघाय॥                                             दोस्तों यह दोहा रहीम जी द्वारा रचित है।  इसका सीधा सा अर्थ ये है की अगर हम किसी एक काम को पूरी लगन और मेहनत से करे तो हमें उस काम में महारत हासिल हो सकती है, और...

जीवन में आत्म निर्भर कैसे बने? Aatmnirbher / Self-dependent kaise bane?

  मेरा मानना है की प्रत्येक इंसान (औरत या आदमी) को जिंदगी में आत्मनिर्भर बनना चाहिए. लेकिन ये कोई प्रक्रिया नहीं है जिसे फॉलो करके आप आत्मनिर्भर हो जाओगे. आत्मनिर्भरता एक गुण है एक आदत है, एक कला है, जिंदगी को जीने की, जो की सतत प्रयासों से धीरे धीरे आपमें आती है. आत्मनिर्भर यानि क्या :- आत्मनिर्भर का मतलब है ऐसा काम जिसके लिए आपको किसी पर निर्भर न रहना पड़े. जब आपको यह विश्वास हो जाये की जो कार्य दूसरा व्यक्ति कर सकता है, वही काम आप भी उतनी ही कुशलता के साथ कर सकते हो तो आप ये समझ लीजिये की आप उस कार्य के लिए आत्मनिर्भर हो चुके है .ऐसा ही बाकि सारे कामो के लिए समझ लीजिये . आत्मनिर्भरता में वो सारे काम आते है जिसे आप पसंद करते है जैसे :- खाना बनाना, घर के छोटे मोटे काम, कमाई के साधन और भी बहुत सारे. आत्मनिर्भर कैसे बनते है :- कुछ भी होने या बनने के लिए क्या जरुरी है, एक लक्ष्य और मेहनत. ठीक इसी तरह आत्मनिर्भर होने के लिए के लिए भी यही गुण आवश्यक है . सबसे पहले तो आपको ये तय करना है की आपको किस कार्य में आत्मनिर्भर बनना है , उसके बाद उस कार्य को खुद से करने की जरुरत है. जरुरत है उस क...