कुछ दोहे जो आपके जीवन को समझने में काम आएंगे।
दोस्तों आपने बहुत से दोहे पढ़े होंगे, सुने होंगे, लेकिन उसका वास्तविक अर्थ शायद ही किसी ने सीखा होगा। आज बात करते है, उनके वास्तविक अर्थ की। दोस्तों कबीरदास जी, रहीम जी और तुलसीदास जी तथा और भी बहुत से लोगो ने जिंदगी की हकीकत को देखकर, उन्हें दोहो में पिरोया था। ऐसे कुछ दोहे है :-
1.) जैसे तिल में तेल है, ज्यों चकमक में आग,
तेरा साई तुझमे है, तू जाग सके तो जाग।
दोस्तों यह दोहा कबीरदास जी का है। मतलब है, असली मूल तत्व अंदर ही होता है। उसी तरह भगवन भी हमारे अंदर ही है। हमें पहचानने की जरुरत है।
2.) एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।
‘रहिमन’ मूलहि सींचिबो, फूलहि फलहि अघाय॥
दोस्तों यह दोहा रहीम जी द्वारा रचित है। इसका सीधा सा अर्थ ये है की अगर हम किसी एक काम को पूरी लगन और मेहनत से करे तो हमें उस काम में महारत हासिल हो सकती है, और दक्षता प्राप्त हो सकती है। लेकिन हम एक साथ बहुत से कामो को करने की कोशिश करेंगे तो कोई भी काम ढंग से नहीं हो पायेगा।
3.) तुलसी नर का क्या बड़ा, समय बड़ा बलवान
भीला लूटी गोपियाँ, वही अर्जुन वही बाण ।।
यह दोहा तुलसीदास जी द्वारा रचित है। इस दोहे द्वारा तुलसीदास जी पूरी मानव जाती को यह सन्देश देते है की कभी भी किसी कारणवश मनुष्य को अपने पर अहंकार( घमंड) नहीं करना चाहिए, क्यूंकि कोई भी मनुष्य नहीं बड़ा होता बल्कि वक़्त सबसे बड़ा होता है। यहाँ उन्होंने वक़्त की ताकत को समझाया है। धनुर्धारी अर्जुन भी वक़्त आने पर भीलों से गोपियों की रक्षा नहीं कर पाए थे।
दोस्तों आशा है की आपको ये जानकारी पसंद आयी होगी। अपना कीमती समय देने के लिए आपका आभार।
धन्यवाद
जय हिन्द
जय भारत

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